मकई पर अखिल भारतीय समन्वित मकई सुधार परियोजना (एआईसीएमआईपी) के तत्वावधान में 1957 में व्यवस्थित रूप में अनुसंधान प्रारंभ किया गया तथा यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद प्रणाली के अंतर्गत समन्वित परियोजनाओं की सीरीज में प्रथम परियोजना थी। इस परियोजना को पूसा परिसर, नई दिल्ली में प्रारंभ किया गया तथा जनवरी 1994 में  इसे मकई अनुसंधान निदेशालय के रूप में अपग्रेड किया गया। 

जिसका अधिदेश (मेंडेट) अनुसंधान को संगठित करना, उसका संचालन तथा समन्वयन के साथ मानव खाद्य, पशु आहार की निरंतर बढ़ती मांग तथा स्टार्च, तेल तथा अन्य मूल्य वर्धित उत्पादों के रूप में औद्योगिक उपयोग हेतु उत्पादन तथा उत्पादकता को लगातार बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का सृजन,करना था। मक्का अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) को राष्ट्रीय स्तर पर बहुविषयक कार्यक्रमों पर अनुसंधान, समन्वयन तथा प्रबंधन का दायित्व सौंपा गया तथा साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मक्का सुधार हेतु लिंक बनाए रखने का भी दायित्व सौंपा गया। इसके अतिरिक्त, परियोजना का उद्देश्य जैविक/अजैविक दबावों के प्रति प्रतिरोधिता/सहिष्णुता, उन्नत सस्य क्रियाओं तथा गुणवत्ता सुधार द्वारा स्थिर उत्पादन बनाए रखना है। मक्का अनुसंधार निदेशालय मकई के सीधे उपभोग तथा मूल्य वर्धित उत्पादों


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मक्का
अनुसंधा निदेशालय नई दिल्ली - 12 (2009-10)